आपका पर्सनल डाटा इस्तेमाल करने पर पैसा दे रही है ये ऐप! समझिए कैसे होता है ये काम


हाइलाइट्स

केडेन एक अमेरिकी स्टार्टअप है जिसे 60 लाख डॉलर की फंडिंग मिली है.
अगले साल ये ऐप 10000 लोगों के साथ बीटा टेस्टिंग शुरू करेगी.
2018 में नंदन नीलेकणि भी इस तरह की चर्चा कर चुके हैं.

नई दिल्ली. केडेन (Caden) नाम की एक ऐप लोगों के पर्सनल डाटा के बदले उन्हे पैसे दे रही है. ये एक अमेरिकी स्टार्टअप है जो लोगों को अमेजन या Airbnb जैसी वेबसाइट से उनका डाटा डाउनलोड करके एक पर्सनल वॉल्ट में डालने की सुविधा देती है. जो लोग अपनी मर्जी से इस डाटा को शेयर करने के लिए राजी होते हैं उन्हें ये ऐप रेवेन्यू में से एक हिस्सा देती है. गौरतलब है कि आपके पर्सनल डाटा की वैल्यू डिजिटल मार्केटिंग के काफी ज्यादा है लेकिन आप उसको कोई फायदा नहीं मिलता है. ऐसे में लगातार इस परिस्थिति को बदलने के लिए चर्चाएं चलती रहती हैं.

विभिन्न कंपनियां अपने यूजर्स को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उनके डाटा के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर रही हैं. मसलन, ऐपल ने पिछले साल एक नई पॉलिसी जारी की थी, जिसमें कहा गया है कि अब ऐप्स को यूजर्स का पर्सनल डाटा ट्रैक करने के लिए परमिशन लेने की जरूरत है. बता दें कि कई लोग परमिशन देने से मना कर चुके हैं. ऐसे डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों के लिए डाटा एकत्रित कर पाना या उन्हें ट्रैक कर पाना मुश्किल होता जा रहा है.

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कैसे काम करेगा केडेन
वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक लेख के मुताबिक, लोगों का अभी तक अपने डाटा पर कोई कंट्रोल नहीं है. उनका इस्तेमाल किस तरह से किया जाना है इसमें यूजर का कोई मत नहीं लिया जाता है. केडेन इसे बदलने का प्रयास कर रहा है. ये ऐप जिन लोगों का डाटा शेयर करने की अनुमति मांगेगी उन्हें कई तरह के विकल्प भी देगी. इसमें यूजर से पूछा जाएगा कि आपका डाटा कैसे और कहां शेयर किया जा सकता है. कंपनी अगले साल से 10000 लोगों के बीच इसका बीटा टेस्ट शुरू करने वाली है. इसने 60 लाख डॉलर की फंडिंग भी जुटाई है. इसमें पैसा लगाने वालों में याहू के सह-संस्थापक जेरी यांग भी शामिल हैं. खबर के अनुसार, डाटा शेयरिंग के लिए यूजर/कंज्यूमर को 5 से 20 डॉलर के बीच दिया जाएगा.

भारत में 2 साल पहले हुई चर्चा
आपको जानकर हैरानी होगी कि बिलकुल इसी तरह के कॉन्सेप्ट पर भारत में 4 साल पहले चर्चा हो चुकी है. इसकी शुरुआत आधार के आर्किटेक्ट नंदन नीलेकणि ने की थी. उन्होंने कहा था कि लोगों का अपने डाटा पर पूरा अधिकार होना चाहिए और इसका इस्तेमाल उन्हें बेहतर हेल्थकेयर और आसान किस्तों पर लोन लेने के लिए करना चाहिए. टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने भी कहा था कि डाटा का मालिक कंज्यूमर ही होना चाहिए और कंपनियां बस उसकी कस्टोडियन हो सकती हैं. उनका डाटा पर कोई प्राथमिक अधिकार नहीं होना चाहिए. फिलहाल भारत में डाटा शेयरिंग के लिए कोई रिवॉर्ड नहीं है. लेकिन संभव है कि भविष्य में भारतीय लोगों को भी उनके डाटा का सही मूल्य मिलेगा.

Tags: Business news, Data Privacy, Data Protection Bill, Earn money, Personal Data Protection Bill



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