रेपो रेट में हो रही वृद्धि, फ्लोटिंग एफडी में निवेश के लिए क्या यह बिलकुल सही वक्त? क्या है एक्सपर्ट की राय


हाइलाइट्स

फ्लोटिंग रेट एफडी का ब्याज बेंचमार्क में बदलाव के साथ बदलता है.
फिक्सड रेट में आपको एक सुनिश्चित ब्याज दर मिलती रहती है.
फिक्स्ड रेट में आप बदलती ब्याज दरों का लाभ नहीं ले पाते हैं.

नई दिल्ली. इस साल मई से लेकर अब तक रिजर्व बैंक ने 5 बार रेपो रेट में वृद्धि की है. रेपो रेट में वृद्धि के दो नतीजे सामने आते हैं जिनका असर सीधे आप की जेब पर पड़ता है. पहला, लोन का महंगा हो जाना. दूसरा, आपके निवेश पर ब्याज बढ़ जाना. आज हम बाद आपके निवेश यानी फिक्स्ड डिपॉजिट की करेंगे. फिक्स्ड डिपॉजिट दो प्रकार के होते हैं पहला फिक्स्ड रेट फिक्स डिपॉजिट और दूसरा फ्लोटिंग रेट फिक्स्ड डिपॉजिट.

आज जब आरबीआई द्वारा लगातार रेपो रेट बढ़ाई जा रही है तो लोगों को लगता है कि फ्लोटिंग रेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करना उनके लिए अधिक फायदेमंद होगा. क्या यह सही है? यह जानने से पहले कि फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट में से क्या बेहतर है हमें यह जान लेना चाहिए कि इन दोनों में अंतर क्या है.

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क्या है दोनों में अंतर?
फिक्स्ड रेट एचडी में आपको एक निश्चित समय के लिए निश्चित ब्याज ही मिलता रहेगा. आपके ब्याज पर आरबीआई द्वारा बढ़ाई गई रेपो रेट का कोई प्रभाव नहीं होगा. यहां आपको एक सुनिश्चित दर से ब्याज मिलेगा और आपको पता रहेगा कि आपका निवेश कितनी गति से आगे बढ़ रहा है. इसके उलट फ्लोटिंग रेट में आरबीआई की रेपो रेट या अन्य बेंच मार्क जैसे ट्रेजरी बिल यील्ड में उतार-चढ़ाव का असर दिखाई देगा. ऐसा नहीं है कि फ्लोटिंग रेट एफडी में सिर्फ आपको फायदा ही होगा. जैसा कि हमने बताया कि यह रेपो रेट या अन्य बेंचमार्क से जुड़ा हुआ एफडी है तो बैंचमार्क में हुए बदलाव का असर यहां दिखाई देगा. मसलन, अगर रेपो रेट बढ़ती है तो एफडी पर ब्याज दर भी बढ़ जाएगी. वहीं, अगर रेपो रेट घटती है तो ब्याज दर भी घटेगी. जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट एफडी पर रेट के घटने और बढ़ने का आपके रिटर्न पर कोई असर नहीं होगा.

क्या फ्लोटिंग रेट में निवेश का सही समय?
अब सवाल उठता है कि क्या यह फ्लोटिंग रेट एफडी में निवेश का सही समय है. फिइनोवेटिव की सीईओ और को-फाउंडर स्नेहल मोता कहती हैं कि ब्याज दरों के बढ़ने का फायदा इसमें मिलता है इसलिए फ्लोटिंग रेट डिपॉजिट्स बेहतर लगते हैं. हालांकि, इसमें तीन जोखिम है. पहला, जैसे-जैसे बेंचमार्क रेट बढ़ता है इंटरेस्ट रेट भी बढ़ता है, लेकिन उसके गिरने पर ब्याज दर भी गिर जाती है. मान लीजिए कि आपकी एफडी का बेंचमार्क 91 दिन का टी-बिल है. इसमें होने वाली गिरावट का असर आपके ब्याज पर भी होगा. दूसरा यह फ्लोटिंग एफडी तभी फायदेमंद होती है जब ब्याज दर बढ़ रही हो. लेकिन, आरबीआई 2022 में पहले ही रेपो रेट को 225 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा चुका है. इसमें आगे बढ़ोतरी की गुंजाइश काफी कम दिखती है.

तीसरा, बहुत हद तक संभव है कि जीडीपी ग्रोथ को और हानि ना पहुंचाने और उसे बेहतर बनाने के लिए आरबीआई रेपो रेट पर थोड़ी नरमी बरते और इसमें कमी लाए. वे आगे कहती हैं कि निवेशक अपने एफडी के कुल निवेश का 20 फ़ीसदी फ्लोटिंग एफडी में डाल सकते हैं, उससे अधिक फिलहाल फ्लोटिंग एफडी में डालना सही नहीं होगा.

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