सोना ‘चमक’ रहा फिर निवेशक नहीं लगा रहे अपना पैसा, क्‍या है Gold से भी ज्‍यादा पसंदीदा


हाइलाइट्स

भारत में डीमैट अकाउंट्स की संख्या साल 2022 में 34 फीसदी बढ़कर 10.8 करोड़ हो गई है.
डीमैट अकाउंट्स की संख्या बढ़ने के साथ ही इसके एक्टिव कस्टमर्स की संख्या में कमी हो रही है.
2022 में आईपीओ की संख्या में आई कमी ने डीमैट अकाउंट्स की वृद्धि दर को प्रभावित किया है.

नई दिल्ली. सोने की कीमत रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच चुकी है, लेकिन निवेशक अपना पैसा कहीं और लगा रहे हैं. दिसंबर में डीमैट खाता खोलने वालों की संख्‍या 34 फीसदी बढ़ गई, जो बताती है कि शेयरों की चमक अभी सोने से ज्‍यादा दिख रही. कोई शेयर मार्केट में ट्रेडिंग की शुरुआत करता है तो सबसे पहला काम डीमैट अकाउंट खुलवाना होता है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डीमैट अकाउंट्स की संख्या इस साल 34 फीसदी बढ़ी है. दिसम्बर 2022 तक देश मे डीमैट अकाउंट्स की संख्या बढ़कर 10.8 करोड़ हो गई. डीमैट अकाउंट्स की संख्या में बढ़ोतरी के पीछे शेयर बाजारों से आकर्षक रिटर्न मिलना, अकाउंट खोलने का प्रोसेस आसान होना और फाइनेंशियल सेविंग में वृद्धि जैसे कारण है. डीमैट अकाउंट्स की संख्या बढ़ने के साथ ही इसके एक्टिव कस्टमर्स की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है. आइए जानते हैं इस पर एक्सपर्ट क्या कहते हैं

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ये है एक्सपर्ट्स की राय
हर महीने जुड़ने वाले अकाउंट्स की वृद्धि दर सुस्त पड़ने को लेकर यस सिक्योरिटीज के पीआरएस इक्विटी रिसर्च प्रमुख निस्ताशा शंकर का मानना है कि इसके पीछे मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊंची ब्याज दरें और बढ़ती मुद्रास्फीति आदि वजहें शामिल हैं. इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण देखी गई अस्थिरता भी इसका एक मुख्य कारण है. जबकि आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स की इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के सीईओ रूप भूरा का कहना है कि एक साल पहले की तुलना में वर्ष 2022 में आईपीओ की संख्या में आई कमी भी पिछले कुछ महीनों में डीमैट खातों की वृद्धि दर को प्रभावित किया है.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर घट रहे एक्टिव कस्टमर
डीमैट अकाउंट्स की संख्या तो लगातार बढ़ रही है लेकिन इसी बीच एनएसई पर एक्टिव कस्टमर्स की संख्या में पिछले छह महीनों से लगातार कमी आ रही है. बिजनेस में एक्टिव यूज़र्स की संख्या में सालाना आधार पर 12 फीसदी बढ़ोतरी हुई लेकिन दिसंबर, 2022 में ये एक फीसदी कम होकर 3.5 करोड़ हो गए. मोतीलाल ओसवाल इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के बैंकिंग और फाइनांशियल रिसर्च प्रमुख नितिन अग्रवाल का कहना है कि अस्थिरता बढ़ने से वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी छमाही में बाजार में आने वाले ग्राहक अपनी खरीद-बिक्री गतिविधियां कम कर रहे हैं.

इन फर्मों में एक्टिव कस्टमर बढ़े
मौजूदा समय में एनएसई पर देश की शीर्ष पांच ब्रोकिंग फर्मों में एक्टिव कस्टमर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 59.3 प्रतिशत हो गई है जबकि दिसंबर, 2021 में यह अनुपात 56.2 प्रतिशत था. इन फर्मों में जेरोधा, एंजेल वन, ग्रो, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और आईआईएफएल सिक्योरिटीज शामिल हैं.

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