Business Idea: सर्दियों के सीजन में शुरू करें इन सब्जियों की खेती, होगी बंपर कमाई


हाइलाइट्स

सर्दियों में पालक की पैदावार बाकी सीजन की तुलना में कई गुना हो जाती है.
सर्दी में साग के लिए सरसों के पत्तों की डिमांड भी काफ़ी ज्यादा रहती है.
बुआई के 25-30 दिन बाद मेथी के पत्ते साग के लिए तैयार हो जाते हैं.

नई दिल्ली. बाजार में हर तरह की सब्जियां लगभग सालभर मिलती रहती है. लेकिन कुछ सब्जियों का अपना सीजन होता है या यूं कहें कि उन्हें विशेष समय में ही उगाया जाता है. वैसे सर्दियों में बाकी मौसमों की तुलना में सब्जियों की वैराइटी ज्यादा होती है. यही वो समय होता है जब लोग जमकर खाने पर ध्यान देते हैं, इसलिए सब्जियों की डिमांड भी ज्यादा रहती है.

आज हम आपको कुछ ऐसी सब्जियों के बारे में बता रहे हैं जिनकी खेती आप इस सीजन में कर सकते हैं. इनमें से कुछ सब्जियां किसी भी सीजन में उग जाती है लेकिन उस समय इनका उत्पादन कम होता है, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ता है. दिसंबर माह में आप इन सब्जियों की खेती करके मोटी कमाई कर सकते हैं. इस सीजन में इनकी डिमांड भी ज्यादा रहती है और आपको इनके दाम भी अच्छे मिल जाते हैं.

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पालक की खेती
पालक को ठंडे मौसम में उगने वाली फसल है. लेकिन इसके लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करके आप किसी भी सीजन में इसकी खेती कर सकते हैं. सर्दियों में इसकी पैदावार बाकी सीजन की तुलना में कई गुना हो जाती है. पालक की उन्नत किस्मों में पंजाब ग्रीन व पंजाब सलेक्शन ज्यादा पैदावार देने वाली किस्में मानी जाती हैं. इसकी खेती करने पर आप एक पौधे से कई बार पत्ते काटकर बेच सकते हैं. सर्दियों में यह फिर से बढ़ने में ज्यादा समय भी नहीं लेती है. वहीं बाजार में इसकी डिमांड काफी ज्यादा रहती है जिससे आपको अच्छा मुनाफा मिल सकता है.

सरसों की खेती
सरसों की खेती करने के आपको 2 फायदे एकसाथ मिल जाते हैं. इस फसल के पूरी तरह पकने पर आप इसे बेचकर पैसे कमा सकते हैं. वहीं सर्दी में साग के लिए सरसों के पत्तों की डिमांड भी काफी रहती है. इसलिए इससे पहले भी सरसों के पत्तों को बेचकर आप अच्छी कमाई कर सकते हैं. सरसों की ज्यादा पैदावार वाली किस्मों में क्रांति, माया, वरुणा आदि प्रमुख हैं. सिंचित क्षेत्रों में सरसों की फसल की बुवाई के लिए 5 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टर के दर से प्रयोग करना चाहिए. दोमट मिट्टी सरसों की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

बैंगन की खेती
बैंगन के पौधे पहले पौधशाला में तैयार किए जाते हैं फिर उसकी धान की तरह ही रोपाई की जाती है. बाजार में इसके पौधे आपको आसानी से मिल जाते हैं. आप ये पौधे घर पर भी तैयार कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको पहले तैयारी करनी पड़ती है. बैंगन के पौधे जब 4 से 5 सप्ताह के हो जाते हैं तो उन्हें खेत में लगाया जाता है. इसकी रोपाई करते समय पौधों के बीच में दूरी का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. इन्हें कम से कम एक से डेढ़ फीट की दूरी पर लगाना चाहिए. एक कतार में पौधे लगाने पर आपको बैंगन तोड़ने में आसानी रहती है इसलिए इस बात का भी ध्यान रखें. पूसा पर्पल लौंग, पूसा पर्पल क्लस्टर, पूजा क्रांति, मुक्तकेशी अन्नामलाई, बनारस जैट आदि इसकी उन्नत किस्में मानी जाती है.

मेथी की खेती
सरसों की तरह मेथी की खेती भी आपको दोहरा फायदा करवा सकती है. इसकी खेती करना बहुत आसान है. एक बार फसल बुआई के बाद आपको इसकी नियमित सिंचाई करनी होती है. बुआई के 25-30 दिन बाद इसके पत्ते साग के लिए तैयार हो जाते हैं. इसे आप कई बार काट कर बेच सकते हैं. सिंचाई के बाद फिर से पौधे नए पत्तों के साथ बड़े हो जाते हैं. इस तरह आप जब तक इसके पत्ते साग के लिए उपयुक्त रहते हैं तब तक इसकी कटाई कर सकते हैं. इस पर फूल आने लगने के बाद कुछ समय के लिए इनकी बिना कटाई के सिंचाई करने पर मेथी दाना की फसल भी तैयार हो जाती है. औषधीय गुणों के कारण बाजार में मेथी के पत्तों और मेथी दाना दोनों की डिमांड रहती है.

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